चंद्र यान-3 के लॉन्च पैड बनाने वालों को 17 महीने से तनखा नही और उसके बाद भी सरकार की जय जयकार !

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जब चंद्रयान 3 का लॉन्च हुआ मीडिया ने बिके हुए मीडिया की भूमिका निभाते हुए बैलगाड़ी पर रखे सैटेलाइट की तस्वीर खूब चलाई ताकि तुलना करते हुए मोदी की जयजयकार की जा सके सच्चाई यह है कि 1981 में एप्पल सेटेलाइट को बैलगाड़ी पर रखकर ले जाने का फ़ैसला इसरो के वैज्ञानिकों का सोचा-समझा फ़ैसला था. ये उनकी मजबूरी नहीं थी

दरअसल भारतीय वैज्ञानिकों के पास ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफ़ेयरेंस रिफ़्लेक्शन’ तकनीक की सीमित जानकारी थी. वैज्ञानिक सैटेलाइट को किसी इलेक्ट्रिक मशीन पर रखकर नहीं ले जाना चाहते थे. इसीलिए बैलगाड़ी को चुना गया……

लेकिन प्रचंड झूठ की लहर में इस छोटे से सच को कौन बताए

आप बैलगाड़ी की बात कर रहे थे न !…….तो

सच यदि जानने की इच्छा है तो जरा यह भी जान लीजिए कि 2023 में चंद्रयान 3 के लिए जिस कम्पनी ने वो व्हीकल बनाया जिससे रॉकेट को असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च पैड तक ले जाया गया जिस कंपनी ने चंद्र यान का लांच पैड बनाया उसकेे इंजिनियर को मोदी सरकार ने 17 महीने से सैलरी नहीं दी है

उसके बावजूद अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए दिन रात एक कर उस कंपनी ने लॉन्च पैड तैयार किया और रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए सबसे संवदेशनील और जटिलतम उकरण व्हील बोगी सिस्टम का निर्माण किया

 

हम बात कर रहे हैं झारखंड की राजधानी रांची स्थित हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (Heavy Engineering Corporation Limited) की

प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 नवंबर 1963 को इस कंपनी को राष्ट्र को समर्पित किया था. उस वक्त इसे मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्री कहा गया. आज मदर ऑफ इंडस्ट्री पर संकट के बादल हैं.

 

मोदी सरकार सब बेच दो की नीति अपनाए हुए है HEC कंपनी कई बार मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्री से 1,000 करोड़ रुपए के लिए निवेदन कर चुकी है। इस पर मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार कोई मदद नहीं कर सकती। जिसके कारण HEC के कर्मचारी अपना घर चलाने के लिए प्रॉविडेंट फंड का पैसा इस्तेमाल कर रहे हैं। कई कर्मचारी लेकर जीवन-यापन कर रहे हैं।

दरअसल इसरो के लॉन्चिंग पैड को सरकार को बहुत महंगी दरों पर आयात करना पढ़ता था लेकिन. 2005-06 से HEC ने बहुत कम कीमत पर स्वदेश निर्मित लॉन्चिंग पैड प्रदान किया

अभी जो Hec ने व्हील बोगी सिस्टम बनाया है वह पीएसएलवी (रॉकेट) एकीकरण प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.उसका वजन 85 टन है और यह लगभग 900 टन परिवहन करने में सक्षम है. ये सिस्टम डेडिकेटेड होलर वाहन द्वारा संचालित 1.5 किमी के रेल ट्रैक (Rail Track) पर चलता है. यही रॉकेट (Rocket) को असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च पैड तक ले जाता है. यहां तक कि रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के लिए आवश्यक प्रक्षेपण तक निर्देशित भी करता है.

 

यह पहली बार है कि इतनी जटिल संरचना को भारत मे बनाया गया है

HEC देश के लिऐ बहुत महत्वपूर्ण है

एचईसी इस्पात, खनन, रेलवे, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु और सामरिक क्षेत्रों के लिए उपकरणों का निर्माण करता रहा है.

एचईसी ने 1971 के युद्ध में इंडियन माउंटेन टैंक, 105 एमएम गैन बैरल,105 एमएम गैन बैरल,टी- 72 टैंक की कास्टिंग,120 एमएम गन का हीट ट्रीटमेंट और मशीनिंग, आईएनएस राणा के लिए गियर सिस्टम का निर्माण, युद्धपोत के लिए आरमर प्लेट का निर्माण, आधुनिक रडार, परमाणु पनडुब्बी के महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण किया है

देश की इतनी महती आवश्यकताओं को पूरा करने करने वालें संस्थान के साथ मे मोदी सरकार जो रवैया अपना रही है वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है

3 Comments

  1. Great reporting . Lots of love go you. Keep up the good work .

  2. Aapko aur aapke patrkarita ko dil se salam. Malik hamesha khush rakhe hifajat Karen.

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